12 अगस्त को साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा। यह खगोलीय घटना यूरोप, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा, आइसलैंड और ग्रीनलैंड जैसे इलाकों में देखी गई, जहां चंद्रमा ने सूर्य के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से को ढक दिया और दिन में ही अंधेरा छा गया। यूरोप में लगभग 27 साल बाद ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं दिया, इसलिए धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि में बन रहे शुभ योगों का विभिन्न राशियों पर मिला-जुला प्रभाव पड़ेगा। वहीं, वैज्ञानिकों और नासा के विशेष अभियानों के लिए यह ग्रहण सूर्य के कोरोना और वायुमंडलीय बदलावों के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।