भारत में मई के महीने में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है, जहां उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट आई है. मौसम विभाग के अनुसार, मार्च से अब तक आए 15 पश्चिमी विक्षोभों ने गर्मी के असर को कम कर दिया है. विशेषज्ञों ने 10 और 11 मई को एक और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने और 13-14 मई के आसपास चक्रवात बनने की संभावना जताई है, जिससे मानसून में देरी हो सकती है. इस बेमौसम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ा है, जिससे आम, लीची और गेहूं की फसलें प्रभावित हुई हैं. पर्यावरणविदों ने इसे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम बताया है. वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बदलते मौसम के कारण निमोनिया, इन्फ्लूएंजा और चेस्ट इन्फेक्शन के बढ़ते मामलों पर चेतावनी दी है. विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन को प्रकृति के इस असंतुलन का मुख्य कारण माना जा रहा है.