ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय के अनुसार सही तरीके से चरण स्पर्श करने से भाग्य बेहतर हो सकता है और संकट मिट सकते हैं. चरण स्पर्श केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है जिससे ऊर्जा का प्रवाह होता है. उन्होंने बताया कि चरण स्पर्श तीन प्रकार से किया जाता है—झुककर, घुटनों के बल बैठकर और साष्टांग प्रणाम. साष्टांग प्रणाम केवल गुरु और ईष्ट देव का करना चाहिए, जबकि महिलाओं के लिए अर्ध साष्टांग का विधान है. माता-पिता और वरिष्ठजनों को पुत्रियों तथा दामाद से चरण स्पर्श नहीं कराना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिता के चरण स्पर्श से सूर्य, माता से चंद्रमा, बड़े भाई-बहन से मंगल और वृद्धों से बृहस्पति मजबूत होता है. इसके अतिरिक्त उन्होंने लेटे या सोए व्यक्ति के चरण स्पर्श से आयु घटने की बात को आधारहीन और अतार्किक बताया.