नवरात्रि की नवमी तिथि पर माता सिद्धिदात्री की पूजा उपासना करने से समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और व्यक्ति को जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। नवरात्रि में अगर किसी भी दिन उपासना नहीं की है और नवमी तिथि को माता सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं तो समस्त देवियों की पूजा का फल मिलेगा। इस दिन कमल के फूल पर बैठी हुई देवी का ध्यान करना चाहिए। नवरात्रि की नवमी तिथि पर देवी को शहद अर्पित करना चाहिए और ओम सिद्धिदात्री देव्ये नमः मंत्र का जप करना चाहिए। भगवान राम का जन्म वासंतिक नवरात्र के नवें दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। मध्य दोपहर में कर्क लग्न, कर्क राशि और पुनर्वसु नक्षत्र में भगवान राम का जन्म हुआ था। दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच में भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। नवमी के दिन पहले देवी की पूजा करें, फिर भगवान राम की पूजा करें और तब हवन करना चाहिए।
नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी तिथि पर माता महागौरी की पूजा का विधान है। भगवान शिव की प्राप्ति के लिए माता ने कठोर तपस्या की थी जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव ने कमंडल से जल छिड़कने पर उनका शरीर गौर वर्ण का हो गया और इसलिए उनका नाम गौरी हुआ। माता सीता ने भगवान राम की प्राप्ति के लिए माता गौरी की पूजा की थी। विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक मानी जाती है। ज्योतिष में माता गौरी का संबंध शुक्र ग्रह से है जो विवाह और वैवाहिक जीवन का स्वामी है। पूजा में सफेद या पीले फूल अर्पित करें और मूल मंत्र 'ओम ह्रीं गौरीय नमः' का जप करें। अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा है जिसमें दो से 11 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उपहार और दक्षिणा देने का विधान है। 26 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि है और तमाम राशियों के लिए दैनिक राशिफल में धन लाभ, स्वास्थ्य सुधार और शुभ कार्यों के योग बताए गए हैं।
Good News Today के कार्यक्रम 'किस्मत कनेक्शन' में शैलेन्द्र पांडेय ने नवदुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि की महिमा और पूजा विधि के बारे में जानकारी दी। माता कालरात्रि का रंग काला है, तीन नेत्रधारी हैं और गले में विद्युत की माला धारण करती हैं। इनका वाहन गधा है। माता कालरात्रि की उपासना से शत्रु और विरोधी शांत होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-मंत्र का प्रभाव समाप्त होता है तथा शनि संबंधी पीड़ा दूर होती है। पूजा विधि में घी का दीपक जलाना, लाल फूल अर्पित करना और गुड़ का भोग लगाना बताया गया। नवरात्रि की सप्तमी तिथि की रात को 108 लौंग चढ़ाकर नवार्न मंत्र 'ओम ऐंग रींग क्लींग चामुण्डाय विच्चे' का जाप करने से शत्रु शांत होते हैं। कार्यक्रम में 25 March 2026 का पंचांग और 12 राशियों का दैनिक राशिफल भी साझा किया गया।
गुड न्यूज टुडे के कार्यक्रम किस्मत कनेक्शन में एंकर शैलेंद्र पांडेय ने माता दुर्गा के 32 चमत्कारी नामों की महिमा के बारे में विस्तार से बताया। दिनांक 24 March 2026, मंगलवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का पंचांग दिया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि देवी के 32 नाम वास्तव में 32 सिद्ध मंत्र हैं जिन्हें सुबह-शाम देवी के सामने बैठकर स्पष्ट रूप से उच्चारण करने से संपूर्ण पूजा का फल प्राप्त होता है। दुर्गा, दुर्गति शमनी, दुर्गाद्वि निवारणी से लेकर दुर्गतारिणी तक सभी 32 नामों का विवरण दिया गया। विशेष प्रयोग बताया गया कि नवरात्रि में पीले कागज पर लाल स्याही से ये नाम लिखकर धारण करने से दुर्घटना और वाद-विवाद से सुरक्षा मिलती है। 12 राशियों के दैनिक राशिफल के साथ lucky tip और success मंत्र भी साझा किए गए।
Good News Today के कार्यक्रम किस्मत कनेक्शन में शैलेंद्र पांडे ने सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा और प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया। यह स्तोत्र श्री रूद्र यामल के गौरी तंत्र में शिव पार्वती संवाद के नाम से बताया गया है। कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल मिलता है। यह स्तोत्र सरल और प्रभावशाली है और इसके मंत्र अपने आप में सिद्ध मंत्र हैं। नियमित पाठ से समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, वाणी और मन की शक्ति मिलती है, असीम ऊर्जा का संचार होता है और तंत्र मंत्र की नकारात्मक ऊर्जा का असर नहीं होता। संध्या काल या मध्य रात्रि में घी का दीपक जलाकर लाल आसन पर बैठकर इसका पाठ करना चाहिए। कार्यक्रम में 23 March 2026 के पंचांग और 12 राशियों के दैनिक राशिफल की जानकारी भी दी गई।
22 मार्च 2025 को चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है और भरणी नक्षत्र में चंद्रमा मेष राशि में संचरण कर रहे हैं। दुर्गा सप्तशती में माता दुर्गा की महिमा के 700 श्लोक हैं जो तीन भागों में विभाजित हैं - प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और उत्तम चरित्र। ये श्लोक तंत्र साधना के हैं जिनमें मारन, मोहन, उच्चाटन, स्तंभन, वशीकरण और विद्वेषण के श्लोक दिए गए हैं। प्रथम अध्याय से शत्रु भय दूर होता है, दूसरे-तीसरे अध्याय से मुकदमेबाजी में सफलता मिलती है, चौथे अध्याय से अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, पांचवें अध्याय से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। छठवें अध्याय से बड़ी से बड़ी बाधा दूर होती है, आठवें अध्याय से वशीकरण की शक्ति मिलती है, नौवें अध्याय से संपत्ति का लाभ होता है, बारहवें अध्याय से रोगों से छुटकारा मिलता है। सभी राशियों के लिए आज का राशिफल और उपाय भी बताए गए हैं।
21 मार्च 2026, शनिवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। नवरात्रि में नारियल के विशेष प्रयोग और महत्व बताते हुए समझाया गया कि नारियल को श्रीफल माना जाता है और यह लक्ष्मी जी का स्वरूप है। देवी की पूजा में नारियल का विशेष महत्व है और इसे बलि के प्रतीक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। भूरे रंग के नारियल का प्रयोग देवी की पूजा में करना चाहिए जिसके अंदर गिरी और जल दोनों हों। नवरात्रि में नारियल को मौली से बांधकर कलश पर या देवी के चरणों में रखना चाहिए। ग्रह दशा शांति के लिए नारियल को गोद में रखकर विशेष मंत्र का जाप करने और फिर बहते जल में प्रवाहित करने का उपाय बताया गया। नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-मंत्र से मुक्ति के लिए सूखे नारियल में चीनी भरकर पेड़ के नीचे दबाने का उपाय भी साझा किया गया। अगर नवरात्रि के बाद नारियल खराब निकले तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा की अधिकता का संकेत है।
Good News Today के कार्यक्रम किस्मत कनेक्शन में शैलेंद्र पांडे ने नवरात्रि के दौरान देवी कवच की महिमा और महत्व के बारे में विस्तार से चर्चा की. देवी कवच का उपदेश ब्रह्मा जी ने मार्कंडे ऋषि को दिया था. इस कवच में अपूर्व शक्ति मानी जाती है जो हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करती है. देवी कवच का पाठ करने से अकाल मृत्यु, तंत्र-मंत्र, मुकदमे, दुर्घटना, बीमारियों और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है. कार्यक्रम में बताया गया कि रोज सुबह या मध्य रात्रि में देवी के सामने घी का दीपक जलाकर और जल रखकर देवी कवच का पाठ करना चाहिए. पाठ समाप्त होने के बाद उस जल को शरीर पर छिड़कना चाहिए. कार्यक्रम में 12 राशियों का दैनिक राशिफल भी बताया गया और नवरात्रि में लौंग की माला अर्पित करने का लकी टिप दिया गया.
चैत्र नवरात्रि 19 March 2026 से 27 March तक नौ दिनों तक मनाई जाएगी। नवरात्रि से वातावरण की नकारात्मकता समाप्त होती है और जीवन सात्विक बनता है। नौ दिनों में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है - पहले दिन माता शैलपुत्री, दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी और नवमी को माता सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त 19 March को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक है। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में है। नवरात्रि में व्रत रखना या सात्विक भोजन करना चाहिए, प्याज-लहसुन से परहेज करें। कलश में जल भरकर सिक्का डालें, नारियल रखें और जौ बोएं। कलश के पास घी या तिल के तेल का अखंड दीपक जलाना आवश्यक है।
किस्मत कनेक्शन कार्यक्रम में शैलेंद्र पांडे ने शहद के धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व पर चर्चा की। शहद मधुमक्खियों द्वारा बनाया जाने वाला प्राकृतिक मीठा पदार्थ है जिसका प्रयोग प्राचीन काल से औषधि और धार्मिक कार्यों में होता है। पंचामृत बिना शहद के नहीं बन सकता। ज्योतिष में शहद का संबंध बृहस्पति से माना जाता है। नियमित रूप से शिव जी का शहद से अभिषेक करने पर मंगल दोष समाप्त होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। माता दुर्गा को शहद का भोग लगाने से शत्रु शांत होते हैं। प्रातःकाल गुनगुने पानी के साथ शहद लेने से मोटापा दूर होता है। शहद के साथ तुलसी और अदरक का प्रयोग करने से गले की समस्या में सुधार होता है। कार्यक्रम में 18 March 2026 के पंचांग और बारह राशियों के दैनिक राशिफल की जानकारी भी दी गई।
Good News Today के कार्यक्रम किस्मत कनेक्शन में यह बताया गया कि पशु-पक्षियों का मानव जीवन और भाग्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम के अनुसार, पशु-पक्षी शनि से संबंध रखते हैं और इनकी सेवा से स्वास्थ्य और धन के मामलों पर सीधा असर पड़ता है। पशुओं की सहायता करने से शनि की पीड़ा कम होती है और जीवन का संघर्ष घटता है। गाय, भैंस, कुत्ते को चारा खिलाने से अन्न-जल का अभाव नहीं होता। बीमार पशुओं का इलाज कराने से बड़ी से बड़ी बीमारी से छुटकारा मिलता है। पक्षियों को दाना डालने से राहु की पीड़ा कम होती है और जीवन के उतार-चढ़ाव कम होते हैं। पिंजरे में कैद पक्षियों को छुड़ाने से कर्ज और मुकदमे से राहत मिलती है। हालांकि, पक्षियों को पालना अच्छा नहीं होता क्योंकि यह बेवजह के कर्जों का कारण बनता है। केतु खराब होने पर कुत्ता नहीं पालना चाहिए।