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किस्मत कनेक्शन

दशहरा और विजयादशमी पर मां दुर्गा और श्रीराम की पूजा, जानें महत्व और अचूक उपाय

19 अक्टूबर 2026

दशहरा और विजयादशमी के पावन पर्व पर माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की विधिवत पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन शारदीय नवरात्रि का समापन होता है और कलश विसर्जन के साथ ही शस्त्रों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि दशहरे के दिन महिषासुर मर्दिनी और श्रीराम की आराधना करने से जीवन की समस्त बाधाएं समाप्त होती हैं और विजय की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही दशहरे के दिन घर के मुख्य द्वार पर शमी का पौधा लगाने और उसकी नियमित पूजा करने से सुख-समृद्धि बनी रहती है. कार्यक्रम में सभी 12 राशियों के दैनिक राशिफल के साथ दिन को शुभ बनाने के दान संबंधी उपाय भी साझा किए गए हैं. व्यापारी वर्ग के लिए दशहरे पर नए कार्य की शुरुआत और बहीखाता बदलने की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है.

अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर दूर करें संशय, जानें पूजा का सही समय

18 अक्टूबर 2026

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर बने संशय को स्पष्ट किया गया है. 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर अष्टमी तिथि शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद तुरंत नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी. सप्तमी युक्त अष्टमी होने के कारण दोनों तिथियों का पालन 19 अक्टूबर को ही किया जाएगा. सुबह 10 बजकर 51 मिनट से पहले अष्टमी की पूजा और इसके बाद नवमी की पूजा करने का विधान है. अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा से विवाह बाधाएं दूर होती हैं, जबकि नवमी पर मां सिद्धिदात्री की उपासना व हवन से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. अष्टमी और नवमी एक ही दिन होने से व्रत का पारण दशमी तिथि पर होगा.

नवरात्रि में देवी उपासना से होगी धन प्राप्ति, जानें अचूक उपाय और राशिफल

18 अक्टूबर 2026

किस्मत कनेक्शन के इस विशेष एपिसोड में ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे ने नवरात्रि के दौरान धन प्राप्ति, आर्थिक स्थिरता और कर्ज मुक्ति के अचूक उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि संसार का संपूर्ण धन, संपत्ति और ऐश्वर्य देवी के अधीन है और मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां अन्नपूर्णा तथा मां ललिता की साधना से विभिन्न फल प्राप्त होते हैं. कार्यक्रम में 18 अक्टूबर 2026 के पंचांग का विवरण दिया गया और मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए दैनिक राशिफल के साथ उनके जरूरी उपाय भी बताए गए. इसके साथ ही कठोर परिश्रम के बावजूद धन न मिलने, आमदनी के बाद बचत न होने, व्यापार में रुकावट आने तथा भारी कर्ज से छुटकारा पाने के लिए मंत्र जप, हवन और विशेष पूजन विधियों का उल्लेख किया गया है.

सूर्य का तुला राशि में गोचर: जानिए 12 राशियों पर इसका प्रभाव और बचाव के उपाय

16 अक्टूबर 2026

Kismat Connection | सूर्यदेव 17 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सूर्य की स्थिति को कमजोर माना जाता है. इस गोचर के दौरान सूर्य बुध और शुक्र के साथ युति करेंगे, जबकि अष्टम भाव में चंद्रमा की उपस्थिति और मंगल की दृष्टि रहेगी. यह खगोलीय स्थिति दुनिया भर में उथल-पुथल और उपद्रव के संकेत दे रही है, जिसका असर अगले चार महीनों तक देखने को मिल सकता है. यह गोचर वृषभ, सिंह, धनु और मकर राशि वालों के लिए अनुकूल रहेगा, जबकि कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी. गोचर के नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए प्रतिदिन सूर्यदेव को जल अर्पित करने, सूर्याष्टक का पाठ करने और रविवार के दिन नमक व तेल के त्याग की सलाह दी गई है. साथ ही हनुमान जी के दर्शन और संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान व दान को शुभ माना गया है.

दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों की शक्ति, पाठ का महत्व और दैनिक राशिफल जानिए

14 अक्टूबर 2026

Kismat Connection | किस्मत कनेक्शन कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे ने दुर्गा सप्तशती के अध्यायों के महत्व और प्रभाव की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दुर्गा सप्तशती अनादि ग्रंथ है जो मार्कंडेय पुराण के माध्यम से जनसामान्य तक पहुंचा. इसमें 700 श्लोक हैं जिन्हें प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और उत्तम चरित्र में विभाजित किया गया है. यह तंत्र साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें मारण, मोहन, उच्चाटन, स्तंभन, वशीकरण और विद्वेषण जैसी शक्तियां निहित हैं. शैलेंद्र पांडे ने प्रथम से लेकर तेरहवें अध्याय तक के अलग-अलग पाठ के लाभ बताए, जैसे प्रथम अध्याय से शत्रुओं का भय दूर होना, चौथे से श्रेष्ठ जीवनसाथी की प्राप्ति और ग्यारहवें से व्यापार में सफलता. इसके साथ ही उन्होंने मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए 15 अक्टूबर 2026 का दैनिक राशिफल, पंचांग तथा रुके कार्यों और रोग निवारण के विशेष उपाय साझा किए.

नवरात्रि में मां दुर्गा के 32 नामों का पाठ करने से पूरी होगी मनोकामना, जानें विधि

13 अक्टूबर 2026

Kismat Connection | नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के 32 नामों के पाठ और उनकी महिमा का विशेष महत्व बताया गया है. कार्यक्रम में बताया गया कि मंत्रोच्चार में गलती की संभावना से बचने के लिए देवी के 32 नामों का श्रद्धापूर्वक जप करना अधिक फलदायी होता है. ये 32 नाम वस्तुतः सिद्ध मंत्र हैं, जिनका सुबह और शाम पाठ करने से संपूर्ण पूजा का फल मिलता है. पीले कागज पर लाल स्याही से इन नामों को लिखकर पास रखने से दुर्घटनाओं और विवादों से सुरक्षा मिलती है. लोटे में जल रखकर इन नामों का पाठ करने के बाद उस जल को घर में छिड़कने से तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. एक महीने तक लगातार सुबह इन नामों के उच्चारण से बड़ी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. इसके अलावा कार्यक्रम में 14 अक्टूबर 2026 का पंचांग, 12 राशियों का दैनिक राशिफल, लकी टिप और सक्सेस मंत्र भी साझा किया गया.

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानिए संपूर्ण विधि और 12 राशियों का राशिफल

12 अक्टूबर 2026

नवरात्रि के पावन अवसर पर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पाठ का विशेष महत्व रेखांकित किया गया है. यह स्तोत्र श्री रुद्रयामल के गौरी तंत्र में शिव-पार्वती संवाद के रूप में वर्णित है. दुर्गा सप्तशती का पाठ कठिन होने और उसमें त्रुटि की संभावना के कारण सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ अधिक सरल और प्रभावशाली माना जाता है. इसके स्वतः सिद्ध मंत्रों के नियमित पाठ से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल प्राप्त होता है. इसके जप से वाणी और मन की शक्ति बढ़ती है, आलस्य दूर होता है तथा शनि, राहु और केतु जैसे पाप ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति तंत्र-मंत्र की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रहता है. इसके पाठ के लिए गोधूलि वेला या मध्य रात्रि में देवी के समक्ष घी का दीपक जलाकर लाल आसन और लाल वस्त्र में संकल्प लेने का विधान बताया गया है. इसके अलावा सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल भी प्रस्तुत किया गया है.

किस्मत कनेक्शन: देवी कवच से टलेंगी बीमारियां, अकाल मृत्यु और संकट, जानें 12 राशियों का राशिफल

11 अक्टूबर 2026

किस्मत कनेक्शन में ज्योतिषी शैलेंद्र पांडे ने देवी कवच के अमोघ प्रभाव और इसके पाठ के नियमों पर विस्तार से चर्चा की. शैलेंद्र पांडे ने बताया कि ब्रह्मा जी द्वारा मार्कंडेय ऋषि को दिए गए इस उपदेश के पाठ से गंभीर रोगों, तंत्र-मंत्र, कानूनी मुकदमों और शत्रुओं के भय से मुक्ति मिलती है. उन्होंने कहा कि लगातार स्वास्थ्य समस्याएं रहने या असाध्य रोगों की स्थिति में दुर्गा कवच का पाठ अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है. इसके प्रयोग के लिए सुबह या मध्य रात्रि में घी का दीपक जलाकर शुद्ध जल सामने रखकर श्रद्धापूर्वक पाठ करने और उस जल को शरीर पर छिड़कने की सलाह दी गई. साथ ही पाठ के दौरान सात्विक रहने और मांस-मदिरा से परहेज करने का निर्देश दिया गया. कार्यक्रम में सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल, पंचांग, लकी टिप और सक्सेस मंत्र भी साझा किया गया.

शारदीय नवरात्रि पर कलश स्थापना के नियम, शुभ मुहूर्त और 12 राशियों का राशिफल

10 अक्टूबर 2026

किस्मत कनेक्शन कार्यक्रम में ज्योतिषी शैलेन्द्र पांडेय ने शारदीय नवरात्रि के महत्व, कलश स्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक रहेगी और इस बार देवी का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो संपन्नता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. कलश स्थापना घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मिट्टी के कलश, जल, सिक्का, मौली बंधे नारियल और अखंड दीपक के साथ की जाती है. 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए प्रातः 06:18 से 10:11 तक और दोपहर 11:44 से 12:30 तक का समय सबसे शुभ रहेगा. इसके साथ ही कार्यक्रम में पंचांग, ग्रहों की स्थिति और सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल प्रस्तुत किया गया.

पितृ विसर्जन अमावस्या का महत्व: जानिए श्राद्ध के नियम, राहु शांति के उपाय और राशिफल

09 अक्टूबर 2026

अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पितृ विसर्जन अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सूक्ष्म लोक से धरती पर आए पितरों को श्रद्धापूर्वक याद कर उनकी विदाई की जाती है. यदि पूरे पितृपक्ष में पितरों का स्मरण न किया गया हो या देहांत की तिथि अज्ञात हो, तो इस अमावस्या पर श्राद्ध और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है. इस अवसर पर दोपहर के समय सात्विक भोजन बनाकर पंच बलि निकालने, अग्नि में आहुति देने और सात्विक ब्राह्मण को भोजन कराने का विधान बताया गया है. इसके अलावा, पूर्वजों और पितरों का संबंध राहु ग्रह से होने के कारण इस दिन उड़द की दाल, बड़े और खीर-पूड़ी का दान करने तथा राहु मंत्रों का जप करने से राहु की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. निर्धन व्यक्ति केवल जल तर्पण, श्रद्धा और प्रार्थना द्वारा भी श्राद्ध कर्म संपन्न कर सकते हैं.

किस्मत कनेक्शन: चरण स्पर्श के नियम, फायदे और ग्रहों की शांति, पंडित शैलेंद्र पांडेय से जानिए

08 अक्टूबर 2026

ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय के अनुसार सही तरीके से चरण स्पर्श करने से भाग्य बेहतर हो सकता है और संकट मिट सकते हैं. चरण स्पर्श केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है जिससे ऊर्जा का प्रवाह होता है. उन्होंने बताया कि चरण स्पर्श तीन प्रकार से किया जाता है—झुककर, घुटनों के बल बैठकर और साष्टांग प्रणाम. साष्टांग प्रणाम केवल गुरु और ईष्ट देव का करना चाहिए, जबकि महिलाओं के लिए अर्ध साष्टांग का विधान है. माता-पिता और वरिष्ठजनों को पुत्रियों तथा दामाद से चरण स्पर्श नहीं कराना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिता के चरण स्पर्श से सूर्य, माता से चंद्रमा, बड़े भाई-बहन से मंगल और वृद्धों से बृहस्पति मजबूत होता है. इसके अतिरिक्त उन्होंने लेटे या सोए व्यक्ति के चरण स्पर्श से आयु घटने की बात को आधारहीन और अतार्किक बताया.