कुंडली में शनि और चंद्रमा का संबंध होने पर विषयोग बनता है. चंद्रमा के नकारात्मकता ग्रहण करने और शनि द्वारा उसे स्थाई बनाने से यह योग जीवन को प्रभावित करता है. यदि राहु भी इसमें शामिल हो जाए तो नकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. शनि चंद्रमा का विषयोग जीवन के लगभग हर क्षेत्र पर असर डालता है. यह योग पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण भी हो सकता है. शनि चंद्रमा का विषयोग एक अत्यंत नकारात्मक योग है और अगर ये योग कुंडली में है तो ये कदम कदम पर जीवन की परीक्षा लेता है और कदम कदम पर जीवन में मुश्किलें पैदा करता है. इस योग के कारण व्यक्ति को नशे की लत, कर्कश वाणी, अकेलापन और रहस्यमयी बीमारियां हो सकती हैं. यह मानसिक बीमारी, डिप्रेशन, सुसाइडल टेंडेंसी, ओसीडी और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी समस्याएं भी देता है. हालांकि, सही दिशा मिलने पर यह योग व्यक्ति को उच्च स्तर का आध्यात्मिक बना सकता है और विदेश में सफलता दिला सकता है. इसके निवारण के लिए सूर्य को जल अर्पित करना, रुद्राष्टक का पाठ, एकादशी का उपवास, पन्ना धारण करना और नमः शिवाय का जप जैसे उपाय बताए गए हैं.