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Kismat Connection: नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की महिमा, पूजा विधान और शुभ फल

नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी तिथि पर माता महागौरी की पूजा का विधान है। भगवान शिव की प्राप्ति के लिए माता ने कठोर तपस्या की थी जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव ने कमंडल से जल छिड़कने पर उनका शरीर गौर वर्ण का हो गया और इसलिए उनका नाम गौरी हुआ। माता सीता ने भगवान राम की प्राप्ति के लिए माता गौरी की पूजा की थी। विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक मानी जाती है। ज्योतिष में माता गौरी का संबंध शुक्र ग्रह से है जो विवाह और वैवाहिक जीवन का स्वामी है। पूजा में सफेद या पीले फूल अर्पित करें और मूल मंत्र 'ओम ह्रीं गौरीय नमः' का जप करें। अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा है जिसमें दो से 11 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उपहार और दक्षिणा देने का विधान है। 26 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि है और तमाम राशियों के लिए दैनिक राशिफल में धन लाभ, स्वास्थ्य सुधार और शुभ कार्यों के योग बताए गए हैं।