नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर बने संशय को स्पष्ट किया गया है. 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर अष्टमी तिथि शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद तुरंत नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी. सप्तमी युक्त अष्टमी होने के कारण दोनों तिथियों का पालन 19 अक्टूबर को ही किया जाएगा. सुबह 10 बजकर 51 मिनट से पहले अष्टमी की पूजा और इसके बाद नवमी की पूजा करने का विधान है. अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा से विवाह बाधाएं दूर होती हैं, जबकि नवमी पर मां सिद्धिदात्री की उपासना व हवन से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. अष्टमी और नवमी एक ही दिन होने से व्रत का पारण दशमी तिथि पर होगा.