नवरात्रि के पावन अवसर पर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पाठ का विशेष महत्व रेखांकित किया गया है. यह स्तोत्र श्री रुद्रयामल के गौरी तंत्र में शिव-पार्वती संवाद के रूप में वर्णित है. दुर्गा सप्तशती का पाठ कठिन होने और उसमें त्रुटि की संभावना के कारण सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ अधिक सरल और प्रभावशाली माना जाता है. इसके स्वतः सिद्ध मंत्रों के नियमित पाठ से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल प्राप्त होता है. इसके जप से वाणी और मन की शक्ति बढ़ती है, आलस्य दूर होता है तथा शनि, राहु और केतु जैसे पाप ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति तंत्र-मंत्र की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रहता है. इसके पाठ के लिए गोधूलि वेला या मध्य रात्रि में देवी के समक्ष घी का दीपक जलाकर लाल आसन और लाल वस्त्र में संकल्प लेने का विधान बताया गया है. इसके अलावा सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल भी प्रस्तुत किया गया है.