सावन के अंतिम और चौथे सोमवार के अवसर पर देशभर के प्रसिद्ध शिवालयों तथा ज्योतिर्लिंगों में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. गुजरात के सोमनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, देवघर के बैद्यनाथ और वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती और भस्म आरती के बाद जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक हुआ. मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर, प्रयागराज के मनकामेश्वर, दिल्ली के गौरी शंकर और अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों ने गंगाजल, दूध तथा बेलपत्र अर्पित कर पूजन किया. काशी में बाढ़ की स्थिति के बावजूद कांवड़ियों का उत्साह देखा गया और प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए. इस दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का दुर्लभ संयोग बना. ज्योतिष आचार्यों के अनुसार प्रदोष काल में पूजन से पूरे सावन मास का पुण्य प्राप्त होता है. इसके साथ ही पूजा विधि के दौरान सही दिशा, शिव परिवार के पूजन क्रम और तांबे के पात्र में दूध न चढ़ाने जैसी सावधानियों के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया.