भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अजा एकादशी को भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर अश्वमेध यज्ञ और गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. पौराणिक कथा के अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ राज्य और पारिवारिक सुख पुनः प्राप्त किया था. एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करने और भगवान विष्णु को प्रिय फल, फूल व मिष्ठान अर्पित कर आराधना करने का विधान है. इसके साथ ही जीवन की विभिन्न समस्याओं के निवारण के लिए विशेष दान का महत्व बताया गया है, जैसे स्वास्थ्य के लिए अन्न, आर्थिक उन्नति के लिए वस्त्र या छाता और शीघ्र विवाह के लिए हल्दी या केले का दान. संतान संबंधी बाधाओं के निवारण हेतु संतान गोपाल मंत्र के जाप और पीपल का वृक्ष लगाने का उल्लेख किया गया है.