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Apara Ekadashi Vrat: अपरा एकादशी पर श्री हरि की पूजा का महत्व, जानें व्रत के नियम और विष्णु गायत्री मंत्र के लाभ

ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। गुड न्यूज़ टुडे के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में अपरा एकादशी के महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार धन, यश और पापों से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार, इस व्रत के पुण्य से प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल सकती है। एकादशी के दिन निर्जल या फलाहारी व्रत रखा जा सकता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु को अक्षत, पुष्प, पंचमेवा और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' और विष्णु गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शुद्धि और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। इसके अलावा, पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने और दीप जलाने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।