scorecardresearch
Advertisement

Banke Bihari Mandir: निधिवन से प्राकट्य की कथा और गर्भगृह में बार-बार पर्दा लगाने का रहस्य

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में विराजमान स्वयंभू विग्रह का प्राकट्य स्वामी हरिदास की अनन्य भक्ति और संगीत साधना से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार 16वीं शताब्दी में निधिवन में राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी बांके बिहारी के एक ही विग्रह में समाहित होकर प्रकट हुई थी. मंदिर में स्थापित इस त्रिभंगी प्रतिमा से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं प्रचलित हैं. यहां भगवान के सम्मोहन और भक्त के प्रति उनके आकर्षण के कारण हर दो मिनट में गर्भगृह का पर्दा लगाया जाता है. इसके अलावा, साल में सिर्फ एक बार शरद पूर्णिमा के दिन बिहारी जी बांसुरी धारण करते हैं और केवल अक्षय तृतीया पर उनके चरण दर्शन होते हैं. बाल स्वरूप और रात्रि में रास रचाने की मान्यता के कारण मंदिर में मंगला आरती नहीं कराई जाती है.