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Bhanu Saptami 2026: भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना के नियम, रवि पुष्य योग के संयोग और गया का शालिग्राम सूर्य मंदिर

भानु सप्तमी पर सूर्य देव की विशेष साधना और अर्घ्य के विधान का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया गया है. पंचांग के अनुसार जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. इस पावन अवसर पर रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और साध्य योग जैसे दुर्लभ संयोग बनते हैं. मान्यता है कि इस दिन तांबे के लोटे या थाल में जल, रोली, अक्षत और तिल अर्पित कर सूर्य देव की आराधना करने से शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर होते हैं, करियर में सफलता मिलती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है. कार्यक्रम में कमजोर नेत्र ज्योति, माइग्रेन और चर्म रोगों से मुक्ति के लिए गुड़, तांबे का सिक्का और लाल वस्त्र के दान का उपाय बताया गया है. इसके साथ ही बिहार के गया जिले में फल्गु नदी तट पर स्थित ब्राह्मणी घाट के अद्वितीय सूर्य मंदिर की महिमा भी बताई गई है, जहां भगवान सूर्य अपनी पत्नी क्षया देवी, पुत्र शनि व यम और सारथी अरुण के साथ सात फीट ऊंची शालिग्राम शिला की आदमकद प्रतिमा के रूप में विराजमान हैं.