उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के तहत भगवान विष्णु के परम धाम बद्रीनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। शीतकाल के छह महीने बंद रहने के बाद अब आम भक्त भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर सकेंगे। बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ कहा जाता है, जहां श्री हरि ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इस भव्य मंदिर में नर और नारायण की पूजा होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता लक्ष्मी ने बदरी यानी बेर के वृक्ष का रूप धारण कर भगवान विष्णु की भारी हिमपात से रक्षा की थी, जिसके बाद इस पवित्र स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा। यहां भगवान विष्णु के पांच स्वरूपों यानी पंच बदरी की भी विशेष महिमा है। कपाट खुलने के साथ ही भगवान की उत्सव मूर्ति उद्धव जी मंदिर में प्रवेश करती हैं और मां लक्ष्मी मंदिर से बाहर आ जाती हैं। अब अगले छह महीने तक यहां भक्तों का तांता लगा रहेगा और भगवान बद्रीनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।