दीपावली के पावन पर्व पर महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर महानिशा की रात्रि में किए गए पूजन से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है. ज्योतिष के अनुसार, दिवाली पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न यानी वृषभ व सिंह लग्न को अत्यंत फलदायी माना गया है. मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूजन में कमल का फूल, कमलगट्टा, कौड़ी, गोमती चक्र, मखाना, खीर और सिंदूर अर्पित करने का विधान है. साथ ही कनकधारा स्तोत्र अथवा श्री सूक्त का पाठ अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी, लक्ष्मी जी और कुबेर जी की स्थापना कर विधिवत दीप प्रज्वलन करने से नकारात्मकता का नाश होता है. इसके अतिरिक्त फंसा हुआ धन वापस पाने और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के लिए विशेष ज्योतिषीय उपायों की जानकारी दी गई है.