विजयादशमी का पावन पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है. पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल दशमी तिथि पर भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का वध किया था. इस विशेष अवसर पर विजय मुहूर्त, श्रवण नक्षत्र और प्रदोष काल में पूजन और रावण दहन की परंपरा है. कार्यक्रम में बताया गया कि इस दिन मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ भगवान श्रीराम का विधि-विधान से पूजन करना चाहिए. इसके अलावा अस्त्र-शस्त्र, शमी वृक्ष और अपराजिता के पौधे की पूजा करने से जीवन की समस्त बाधाओं का निवारण होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास रहता है. ज्योतिषीय दृष्टि से श्रीराम और रावण की कुंडली के ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया. साथ ही राम रक्षा स्तोत्र के पाठ और विशेष मंत्र जप से शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति प्राप्त करने के उपाय बताए गए.