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Ganga Saptami: गंगा सप्तमी पर जानें मां गंगा के अवतरण की कथा और गंगाजल के कभी खराब ना होने का वैज्ञानिक रहस्य

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन मां गंगा के भगवान शिव की जटाओं में अवतरित होने और उनके पुनर्जन्म के रूप में जाना जाता है। पुराणों के अनुसार, राजा सगर के पुत्रों के उद्धार के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को धरती पर बुलाया था। धार्मिक महत्व के साथ-साथ गंगा नदी का वैज्ञानिक महत्व भी है। हिमालय से निकलने के कारण इस जल में कई औषधीय गुण होते हैं, जिससे गंगाजल सालों तक खराब नहीं होता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष के अनुसार, घर के ईशान कोण में धातु के पात्र में गंगाजल रखने से वास्तु दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर आर्थिक संकट और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।