सनातन धर्म में जन्म और मृत्यु के चक्र को जीवन का सबसे अटल सत्य माना गया है। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीवात्मा के सफर, यमलोक यात्रा और कर्मों के आधार पर मिलने वाले परिणामों का विस्तार से वर्णन किया गया है। मान्यता के अनुसार, पंचतत्वों से बना मानव शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अजर और अमर रहती है। गरुड़ पुराण न केवल परलोक और सद्गति की राह दिखाता है, बल्कि जीवित रहते हुए मनुष्य को धर्म और सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। इसमें दिवंगत आत्मा के निमित्त पिंडदान, तर्पण और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा गौदान, अन्नदान, तुलसी और गंगा पूजन जैसे कर्मों को मोक्ष की प्राप्ति में अत्यंत फलदायी माना गया है।