आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष और ज्ञान के मार्ग पर ले जाते हैं। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। गुरु पूर्णिमा पर स्नान और व्रत के बाद अपने गुरु की पूजा, दर्शन और वस्त्र या दक्षिणा भेंट करने का विधान है। इस दिन बुधादित्य योग, शश राजयोग और हंस राजयोग का शुभ संयोग बन रहा है। यदि किसी व्यक्ति के गुरु नहीं हैं, तो वे भगवान शिव या श्री कृष्ण को गुरु मानकर मानसिक रूप से पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।