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Jagannath Rath Yatra: 14 दिन का एकांतवास, जड़ी-बूटियों से उपचार और पुरी मंदिर के अद्भुत चमत्कार

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन होता है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाली इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा के स्नान के बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं, जिसके कारण वे 14 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस दौरान जड़ी-बूटियों और काढ़े से उनका उपचार किया जाता है। स्वस्थ होने के बाद रथयात्रा निकाली जाती है। तीनों देवों के रथ नीम की लकड़ी से बिना किसी कील के बनाए जाते हैं। रथयात्रा में हेरा पंचमी, सुना वेश, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री विजय जैसी कई महत्वपूर्ण रस्में निभाई जाती हैं। पुरी के मंदिर से जुड़े कई चमत्कार भी हैं, जैसे मंदिर के शिखर का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। जो भक्त पुरी नहीं जा सकते, वे घर पर ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिकृति स्थापित कर सात्विक भोग लगाकर पूजा कर सकते हैं।