scorecardresearch

Jaya Parvati Vrat: जया पार्वती और कोकिला व्रत की महिमा, जानें सुयोग्य वर एवं अखंड सौभाग्य की पूजा विधि

आषाढ़ मास में मनाया जाने वाला जया पार्वती व्रत और कोकिला व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. जया पार्वती का व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से प्रारंभ होकर सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है, जिसे मुख्यतः पश्चिमी भारत और गुजरात में पांच दिनों तक उत्सव की तरह मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य एवं सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं. इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पार्थिव पूजा, रुद्री पाठ तथा ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप का विशेष महत्व है. वहीं आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखे जाने वाले कोकिला व्रत में माता पार्वती के सती स्वरूप और कोयल रूप की उपासना की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार माता सती ने भगवान शिव के विरह में कोयल बनकर तपस्या की थी. इन दोनों व्रतों का विधि-विधान पूर्वक पालन करने से कुंडली के ग्रह दोष समाप्त होते हैं और सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं.