ज्येष्ठ पूर्णिमा, जिसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की उपासना करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. स्नान, ध्यान और दान का इस तिथि पर बहुत पुण्यदायी फल मिलता है. गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों को जल, फल, छाता या चप्पल दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. वट वृक्ष की परिक्रमा और पूजा कर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. संतान प्राप्ति के लिए इस दिन बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और तुलसी के पास विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. साथ ही, घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भगवान वराह की तस्वीर ईशान कोण में लगाने और आम के पत्तों का वंदनवार मुख्य द्वार पर बांधने के उपाय भी बताए गए हैं. सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाती है.