scorecardresearch

Prarthana Ho Sweekar: मौली बांधने के ये नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य या पूजा-पाठ के दौरान कलाई पर कलावा या मौली बांधने की परंपरा है। इसे रक्षा सूत्र भी कहा जाता है, जो त्रिदेवों और त्रिशक्तियों का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था। कलावा बांधने के धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक और चिकित्सकीय लाभ भी हैं। यह शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। कलाई पर बंधा कलावा एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव डालता है, जिससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है। ज्योतिष के अनुसार, अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विभिन्न रंगों के कलावे धारण किए जाते हैं। शिक्षा के लिए नारंगी, विवाह के लिए पीला और सफेद, रोजगार के लिए नीला और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए काले रंग का धागा बांधा जाता है। कलावा सूत का होना चाहिए और इसे मंगलवार या शनिवार को बदलना शुभ माना जाता है। पुराने कलावे को वृक्ष के नीचे या मिट्टी में दबा देना चाहिए।