चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार कामदा एकादशी व्रत के प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या का दोष एवं जाने-अनजाने में किए गए सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। व्रत में वासुदेव कृष्ण की उपासना का विधान है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान को पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। पाप नाश, धन प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं। कामदा एकादशी से बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगले की परंपरा शुरू होती है जो हरियाली अमावस्या तक चलती है। यह परंपरा स्वामी हरिदास ने लगभग 600 साल पहले शुरू की थी।