भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. इस दिन मध्यरात्रि में भगवान के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक, शंख ध्वनि, आरती और मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है. जन्माष्टमी पर संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य, शीघ्र विवाह, शिक्षा तथा नौकरी और व्यापार में सफलता के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय और मंत्र जप किए जाते हैं. इसके साथ ही मंदिर में मोरपंख और बांसुरी अर्पित करने, सफेद या पीले वस्त्र धारण कराने और माखन-मिश्री का भोग लगाने का विधान है. श्रद्धालु पूरे दिन व्रत और सात्विक आचरण का संकल्प लेकर मध्यरात्रि में कन्हाई के प्राकट्योत्सव में शामिल होकर पुण्य अर्जित करते हैं.