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Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलता है साहस और आत्मविश्वास का वरदान

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। यह देवी पार्वती का रूप हैं जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है। मां चंद्रघंटा के दस हाथों में अस्त्र शस्त्र हैं और उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि देवी की उपासना से साहस, आत्मविश्वास और शक्ति में वृद्धि होती है तथा भय से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमजोर है या मंगल दोष है, उनके लिए मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। माता को लाल वस्त्र, लाल फूल, तांबे का सिक्का और दूध से बनी मिठाई का भोग चढ़ाना शुभ होता है। इस दिन 'ॐ देवी चंद्रघंटाए नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती के पाठ से देवी के तीनों स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की उपासना होती है। मां चंद्रघंटा की उपासना से मणिपुर चक्र मजबूत होता है और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है।