नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की विधिवत उपासना का विधान है, जिन्हें समस्त सिद्धियों और वरदानों को देने वाली देवी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवमी तिथि पर देवी के इस पूर्ण स्वरूप की आराधना करने से पूरे नौ दिनों के व्रत और पूजन का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार भगवान शिव को भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियां और अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त हुआ था. इस दिन विशेष पूजा, कलश स्थापन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन करने का महत्व है. इसके साथ ही नवग्रहों की शांति के लिए चौमुखी दीपक, कमल पुष्प और विशेष भोग अर्पित करने के उपाय बताए गए हैं. कार्यक्रम में हवन विधि, अज्ञात भय से मुक्ति के ज्योतिषीय प्रयोग और मां के कल्याणकारी बीज मंत्रों के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है.