वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार का जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्री हरि ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा और असुर हिरण्यकश्यप के संहार के लिए यह उग्र रूप धारण किया था। नरसिंह जयंती के दिन गोधूलि वेला यानी संध्या के समय पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि भगवान नरसिंह की उपासना से जीवन के सभी संकट, दुर्घटनाएं, मुकदमे और शत्रु बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए भगवान नरसिंह की चांदी की मूर्ति स्थापित करने और उम्र के बराबर लाल फूल अर्पित कर लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का पाठ करने का उपाय बताया गया है। इसके अलावा, लाल रेशमी धागा अर्पित कर उसे दाहिनी कलाई में बांधने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखकर मध्य रात्रि में भी मंत्रों का जाप करना उत्तम माना गया है। अगले दिन निर्धनों को अन्न और वस्त्र दान कर व्रत का समापन करना चाहिए।