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Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, प्रिय भोग और चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय

नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना का विधान है. धर्मग्रंथों के अनुसार माँ ब्रह्मचारिणी तप, संयम और वैराग्य की देवी हैं, जिनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल सुशोभित है. मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने सहस्त्रों वर्षों तक कठोर तप किया था. मां की आराधना से ज्ञान, धैर्य, एकाग्रता और आत्मबल में वृद्धि होती है तथा स्वाधिष्ठान चक्र व कुंडलिनी जाग्रत होती है. मां ब्रह्मचारिणी को श्वेत वस्तुएं, खीर, दूध की मिठाइयां और विशेष रूप से शक्कर का भोग अत्यंत प्रिय है. शक्कर का प्रसाद बांटने से दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, वे मां को श्वेत पुष्प, सफेद भोग और चांदी का अर्धचंद्र अर्पित कर चंद्रमा संबंधी दोषों से मुक्ति पा सकते हैं. इसके अलावा धन की बाधा दूर करने और नकारात्मकता मिटाने के लिए विशेष मंत्र जाप व उपाय बताए गए हैं.