नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की कृपा और साधना के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत कल्याणकारी माना गया है. मार्कंडेय पुराण के इस अंश में कुल 13 अध्याय और 700 श्लोक समाहित हैं, जो प्रथम, मध्यम और उत्तम चरित्र में विभाजित हैं. मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती के मंत्र कीलित होते हैं, इसलिए पाठ से पूर्व उत्कीलन मंत्र का जाप और कवच, अर्गला व कीलक का पाठ अनिवार्य माना गया है. लाल वस्त्र धारण कर और सात्विकता का पालन करते हुए रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से नवारण मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यदि समय के अभाव में संपूर्ण 13 अध्यायों का पाठ संभव न हो, तो केवल सिद्ध कुंजिका स्तोत्र अथवा देवी के सिद्ध श्लोकों के जाप से भी दुर्गा पाठ के समान फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा सर्व मंगल मांगल्ये और सर्वबाधा प्रशमनम् जैसे मंत्र जीवन के संकट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं.