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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी व्रत का महत्व, अचूक उपाय और श्री हरि विष्णु की पूजा विधि

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। 'गुड न्यूज़ टुडे' के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में बताया गया है कि इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास के मार्गदर्शन में महाबली भीम ने इस व्रत को किया था, जिसके बाद से इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाने लगा। मान्यता है कि केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। इस खास दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। व्रत के दौरान फल, मिष्ठान, स्वच्छ जल का घड़ा, पंखा और सफेद शंख का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। अगले दिन सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि पर जल और अन्न का दान करके ही व्रत का पारण किया जाना चाहिए। पूर्ण श्रद्धा के साथ इस उपवास को करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।