scorecardresearch
Advertisement

पिठोरी अमावस्या पर पितृ तर्पण से लेकर चंद्र दोष निवारण तक, जानिए पूजा, दान और विशेष उपाय

भाद्रपद माह की पिठोरी अमावस्या को कुशाग्रहणी और श्राद्ध अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता के अनुसार इस तिथि पर स्नान, दान, पितृकर्म और वर्ष भर के धार्मिक कार्यों के लिए कुश संग्रह करने का विधान है. पिठोरी अमावस्या पर माताएं संतान की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं तथा पिठोरी देवी, सप्त मातृकाओं व 64 योगिनियों का विधिवत पूजन करती हैं. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज धरती पर आते हैं, इसलिए इस दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दीपदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा पीपल के पेड़ की पूजा, काले तिल, अन्न व वस्त्र दान करने तथा 'ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः' मंत्र के जाप से पितृ प्रसन्न होते हैं. कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत करने और चंद्र दोष निवारण के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक व चंद्र मंत्रों के जाप का विशेष महत्व बताया गया है.