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पितृ दोष के क्या हैं लक्षण? पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और इन उपायों से दोष निवारण की मान्यता

पितृपक्ष के अवसर पर पितृ दोष के लक्षण, इसके ज्योतिषीय प्रभाव और निवारण के उपायों पर प्रकाश डाला गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब पूर्वजों का उद्धार या मोक्ष नहीं होता, तो उनके असंतोष से जीवन में कार्य में व्यवधान, शारीरिक-मानसिक कष्ट, धन हानि और संतान बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ज्योतिष में सूर्य, राहु और केतु को पितृ दोष का मुख्य कारण माना गया है। पितृपक्ष के 15 दिनों में पितरों के निमित्त श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और दोषों का शमन होता है। इसके निवारण हेतु गया तीर्थ में त्रिपिंडी श्राद्ध, अमावस्या पर निर्धनों को भोजन, श्रीमद्भगवद्गीता का नित्य पाठ, पीपल का रोपण और शनिवार को दान करने का विधान बताया गया है। साथ ही घर की शुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के उपाय भी सुझाए गए हैं।