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पितृपक्ष में पितृ दोष से मुक्ति के उपाय, तर्पण-पिंडदान से लेकर पंचबलि तक जानें जरूरी विधान

पितृपक्ष के दौरान कुंडली के अशुभ ग्रहों की शांति और पितरों की मुक्ति के उपायों पर विशेष चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि शनि, राहु और केतु का संबंध पूर्व जन्म के कर्मों, दायित्वों और पितरों की स्थिति से होता है. जब कुंडली में सूर्य या अन्य ग्रहों के साथ राहु, केतु अथवा शनि का संयोग बनता है, तो पितृ दोष की स्थिति उत्पन्न होती है. इस दोष के निवारण के लिए पितृपक्ष में तर्पण, पिंडदान और पीपल के वृक्ष में तिल मिश्रित जल अर्पित करने का विधान है. इसके अलावा, दोपहर के समय पीपल पर सफेद मिठाई व कच्चे सूत की परिक्रमा और शनिवार को अन्न-वस्त्र दान करने से शनि-राहु-केतु शांत होते हैं. पितृपक्ष में पंचबलि कर्म के तहत गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटी को भोजन का अंश समर्पित करने का महत्व भी रेखांकित किया गया.