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Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में गीता पाठ से मुक्ति का विधान, सातवें अध्याय से मोक्ष और पितृ ऋण निवारण

पितृपक्ष के पावन अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ पितरों की तृप्ति और मोक्ष का सबसे सरल साधन माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, तर्पण और पिंडदान के साथ-साथ गीता का श्रवण पूर्वजों को जन्म-जन्मांतर के बंधनों और पितृ ऋण से मुक्त करता है. पितृ विसर्जन अमावस्या या श्राद्ध के दिन दोपहर में गीता का पाठ विशेष फलदायी होता है. यदि आकस्मिक मृत्यु हुई हो या पितरों की आत्मा अतृप्त लगे, तो सातवें, नौवें और ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने का विधान है. घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए अठारहवें अध्याय और पितृ दोष निवारण हेतु गुरुवार को ग्यारहवें अध्याय का पाठ लाभ देता है. पाठ से पूर्व हाथ में जल, तिल और कुशा लेकर संकल्प करना चाहिए और भगवान कृष्ण के समक्ष घी का दीपक जलाकर पीले आसन पर बैठकर सात्विक नियमों का पालन करते हुए पाठ अर्पित करना चाहिए.