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पितृपक्ष में श्राद्ध-तर्पण के साथ पंचबलि क्यों जरूरी? जानिए गाय, कुत्ते, कौए और चींटी को भोजन देने का महत्व

पितृपक्ष में पूर्वजों की तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पंचबलि कर्म का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ धरती पर पशु-पक्षियों के माध्यम से आहार ग्रहण करते हैं. इसलिए श्राद्ध के समय गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी और देवताओं के लिए भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं, जिसे पंचबलि कहा जाता है. धर्मग्रंथों में गाय को पृथ्वी तत्व, कुत्ते को जल तत्व, कौवे को वायु तत्व और चींटी को अग्नि तत्व का स्वरूप माना गया है. इसके अलावा, श्राद्ध कर्म और तर्पण को पूर्ण करने के लिए जल, कुश, काला तिल, उड़द की दाल और अग्नि की आहुति को अनिवार्य बताया गया है. काले तिल और कुश के प्रयोग से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही यथाशक्ति अन्न और वस्त्र दान करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है.