सावन और शिव पूजन की विशेष तिथियों पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी माना गया है. शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रुद्राभिषेक से जीवन के समस्त पापों, कष्टों, रोग और ग्रह दोषों का अंत होता है. रुद्राभिषेक में अलग-अलग सामग्री जैसे जल, दूध, घी, शहद, शक्कर और भस्म का प्रयोग भिन्न-भिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है. दूध और शक्कर से रुद्राभिषेक करने से आरोग्य और विद्वता की प्राप्ति होती है, वहीं शहद से पुरानी बीमारियां दूर होती हैं. हालांकि मनोकामना पूर्ति के लिए सकाम रुद्राभिषेक करते समय शिव वास की तिथियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. श्मशान समाधि या भोजन काल जैसी तिथियों में सकाम अभिषेक वर्जित माना गया है, जबकि महाशिवरात्रि, प्रदोष काल और सावन के सोमवार को बिना मुहूर्त देखे भी रुद्राभिषेक करना सदा शुभ और मंगलकारी होता है.