गुड न्यूज टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना में रंगभरी एकादशी की विशेषता बताई गई। यह तिथि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है जो काशी में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव विवाह के बाद पहली बार माता पार्वती को लेकर वाराणसी गए थे। काशीवासियों ने रंग और गुलाल उड़ाकर उनका स्वागत किया था। इस वर्ष यह एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। श्रीहरि को आंवला अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। काशी में इस दिन से होली का पर्व आरंभ होता है जो छह दिन तक चलता है। बाबा विश्वनाथ का विशेष शृंगार होता है और भक्त रंग, अबीर, गुलाल से होली खेलते हैं। व्रत रखने से धन, स्वास्थ्य और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।