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Ravi Pradosh Vrat: महादेव और सूर्य देव की पूजा विधि, महाउपाय व शुभ मुहूर्त

वैदिक मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत की तिथि महादेव और सूर्य देव की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत मंगलकारी मानी जाती है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाले इस व्रत में भगवान शिव और सूर्य नारायण की आराधना का विशेष विधान है. मान्यता है कि इस दिन संध्या काल यानी प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती का पूजन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और सूर्य देव को अर्घ्य देने से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन का वरदान मिलता है. इसके अलावा, रवि प्रदोष के दिन विशेष महाउपाय करने से सरकारी नौकरी और रोजगार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, पितृ दोष का निवारण होता है तथा कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है. कार्यक्रम में व्रत के नियम, सावधानियां और 26 जुलाई के शुभ मुहूर्त के बारे में भी विस्तार से बताया गया है.