सनातन धर्म में सुबह की आरती के साथ-साथ संध्या पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार, नियमित रूप से संध्या उपासना करने से जीवन में अपार सुख, शांति और संपन्नता आती है. संध्या पूजा से मानसिक और आध्यात्मिक क्षमता का विकास होता है और रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है. संध्या पूजन सूर्यास्त के समय किया जाना चाहिए. पूजा से पहले स्नान करना या हाथ-पैर धोना उत्तम माना गया है. इस दौरान घी या तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. संध्या पूजन में कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं, जैसे पूजा से पहले कुछ न खाना, घंटी न बजाना और फूल न तोड़ना. इसके अलावा, दीपदान का भी बहुत महत्व है. पद्म पुराण और अग्नि पुराण के अनुसार, मंदिरों या नदी के किनारे दीपदान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. दीपदान के समय विशेष मंत्रों का उच्चारण करने से पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है.