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Shani Jayanti: शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति के अचूक उपाय

ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनिवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। मान्यता है कि शनि जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया और शनि दोष के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, काले वस्त्र, तिल और लोहे का दान करना लाभकारी होता है। इस दिन 'ओम शं शनिश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी और श्रीकृष्ण की उपासना भी विशेष फलदायी मानी गई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव का जन्म सूर्य और छाया से हुआ था। पूजा करते समय शनिदेव की आंखों में सीधा नहीं देखना चाहिए। रोजगार और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए निर्धनों को भोजन कराना और दान करना उत्तम उपाय बताया गया है।