ज्योतिष शास्त्र में शनि और मंगल की युति को बेहद प्रभावशाली माना गया है। शनि को वायु तत्व और न्यायाधीश माना जाता है, जबकि मंगल अग्नि तत्व और सेनापति का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों के एक साथ आने से कुंडली में अंगारक योग का निर्माण होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति साहसी बनता है, लेकिन जीवन में आक्रामकता, विवाद और दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल के अवसर पर हनुमान जी की उपासना करने से शनि और मंगल दोनों ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। मंगलवार का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ और सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। कुंडली में मंगल दोष के कारण विवाह में हो रही देरी और कर्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मंगलवार के दिन लाल वस्तुओं का दान और विशेष मंत्रों का जाप लाभकारी होता है।