शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत उपासना की शुरुआत हो रही है. इस बार माता रानी का आगमन रविवार को गज यानी हाथी पर हो रहा है, जिसे सुख, समृद्धि और अच्छी वृष्टि का प्रतीक माना गया है. कार्यक्रम में घट स्थापना के सबसे शुभ मुहूर्त की जानकारी दी गई, जिसमें अभिजीत मुहूर्त सुबह 10:51 से दोपहर 01:09 तक सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. इसके साथ ही कलश स्थापना की पूरी विधि, जौ बोने के महत्व और उसके रंगों के संकेतों पर प्रकाश डाला गया. नवरात्र के पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री की उपासना का विधान है, जो साधकों को आरोग्य, धैर्य और अभय का वरदान देती हैं. मां शैलपुत्री की पूजा में गाय के शुद्ध घी का भोग, सफेद पेड़ा और मंत्र जाप विशेष फलदायी माने गए हैं.