गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकारो' में शीतला अष्टमी पर्व की विस्तृत जानकारी दी गई। यह पर्व चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। मां शीतला को मां भगवती दुर्गा का ही रूप माना जाता है। स्कंद पुराण में इनका उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से चेचक और संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है। इस दिन बासी भोजन ग्रहण करने की परंपरा है जिसे बसौड़ा कहते हैं। इसके बाद गर्मी और बरसात के मौसम में ताजा भोजन करने का संदेश दिया जाता है। मां शीतला के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते होते हैं जो स्वच्छता और समृद्धि के प्रतीक हैं। पूजा विधान में सप्तमी को भोजन तैयार कर अष्टमी को मां को भोग लगाया जाता है। अमृतसर के लोहागढ़ द्वार के पास स्थित मां शीतला का मंदिर दूसरे स्वर्ण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।