धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है। विशेष कार्यक्रम में भगवान विष्णु के शेषनाग पर शयन करने के स्वरूप और उनके 'हरि' तथा 'नारायण' नामों के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला गया। जल में निवास करने और जल की उत्पत्ति भगवान के चरणों से होने के कारण उन्हें नारायण कहा जाता है, जबकि भक्तों के समस्त पापों और कष्टों का हरण करने की वजह से प्रभु का नाम हरि पड़ा। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु का शांत स्वरूप जीवन की कठिन परिस्थितियों में मनुष्य को धैर्यवान रहने की प्रेरणा देता है। इसके अलावा गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की आराधना, पीले वस्त्र व पुष्प अर्पित करने और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे मंत्रों के निरंतर जाप के आध्यात्मिक महत्व को भी रेखांकित किया गया है।