भारतीय धर्म ग्रंथों में योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का साधन माना गया है. गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' के इस एपिसोड में वेदों, उपनिषदों, पुराणों और श्रीमद्भागवत गीता में योग की विस्तृत व्याख्या की गई है. ऋग्वेद और अथर्ववेद में ध्यान, समाधि और प्राणशक्ति का उल्लेख मिलता है. वहीं, 108 प्रमुख उपनिषदों में से 20 को योग उपनिषद कहा गया है. शिव पुराण, अग्नि पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी योग और ओंकार साधना का वर्णन है. भगवान शिव को संसार का सबसे बड़ा योगी और श्रीकृष्ण को सबसे बड़ा कर्मयोगी माना गया है. गीता में श्रीकृष्ण ने 'योगः कर्मसु कौशलम्' का संदेश दिया है, जिसका अर्थ है कुशलतापूर्वक कर्म करना ही योग है. महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग और प्राणायाम के माध्यम से शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है. योग सनातन धर्म की एक ऐसी सर्वोच्च पद्धति है, जो मनुष्य को मोक्ष और आत्म-कल्याण के मार्ग पर ले जाती है.