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Significance of Solah Shringar: सोलह शृंगार से संवरती है किस्मत, जानिए सनातन परंपरा और ज्योतिष में इसका महत्व

सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सोलह शृंगार को सुहाग, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शृंगार का सीधा संबंध ग्रहों की अनुकूलता और जीवन में खुशहाली से होता है. सिंदूर, बिंदी, मांग टीका, काजल, नथ, झुमके, मंगलसूत्र, बाजूबंद, मेहंदी, चूड़ियां, अंगूठी, कमरबंद, पायल, बिछिया, गजरा और विशेष परिधान जैसे सोलह शृंगार शरीर के ऊर्जा चक्रों को संतुलित रखने के साथ नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करते हैं. शास्त्रों के अनुसार मंगलसूत्र में काले मोती और सोने का लॉकेट बृहस्पति को मजबूत कर वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाते हैं. वहीं कांच की चूड़ियां वात, पित्त और कफ को नियंत्रित करती हैं तथा चांदी की पायल और बिछिया रक्त प्रवाह एवं हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार होती हैं.