खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' के इस एपिसोड में महिलाओं के सोलह श्रृंगार के महत्व पर चर्चा की गई है. भारतीय संस्कृति में श्रृंगार केवल शारीरिक सुंदरता का साधन नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध महिलाओं के स्वास्थ्य और ज्योतिष से भी है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, श्रृंगार करने से ग्रहों को मजबूती मिलती है और किस्मत संवरती है. कार्यक्रम में बताया गया है कि सिंदूर लगाने से शरीर की ऊर्जा नियंत्रित होती है और धैर्य बढ़ता है. वहीं, बिंदी आज्ञा चक्र को जागृत करती है. मंगलसूत्र का पीला धागा बृहस्पति ग्रह को मजबूत करता है, जबकि कांच की चूड़ियां शरीर में वात, पित्त और कफ को नियंत्रित रखती हैं. इसके अलावा, चांदी की पायल शरीर की गर्मी को सोखती है और बिछिया महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है. कुंवारी कन्याओं को बिछिया पहनने की मनाही है क्योंकि इससे शुक्र ग्रह अत्यधिक मजबूत हो जाता है. सोलह श्रृंगार महिलाओं के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाता है.