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Aarti Significance: आरती से संपूर्ण होती है साधना, पूजा की पूर्णता के लिए कैसे करें ईश्वर की स्तुति? जानिए आरती का शास्त्रीय विधान और महत्व

इस विशेष कार्यक्रम में आरती के आध्यात्मिक और शास्त्रीय महत्व पर चर्चा की गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, आरती पूजा का संपूर्ण फल है और इसके बिना कोई भी उपासना अधूरी मानी जाती है. स्कंद पुराण का हवाला देते हुए बताया गया कि मंत्रहीन या क्रियाहीन पूजा भी आरती करने से पूर्ण हो जाती है. आरती के दौरान कपूर और घी जलने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण शुद्ध होता है. कार्यक्रम में आरती करने के विशिष्ट नियमों का उल्लेख किया गया है, जैसे थाल को 'ओम' की आकृति में घुमाना और चरणों, नाभि व मुख के सामने दीपक घुमाने की निश्चित संख्या. यह भी स्पष्ट किया गया कि घर में कपूर से और मंदिरों में पंचमुखी दीपक से आरती करना श्रेष्ठ है. आरती के बाद उसकी ऊर्जा को ग्रहण करने और सावधानी बरतने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया है.