सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना गया है. शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप में शिव और शक्ति दोनों समाहित हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन और गति के लिए आवश्यक हैं. इस वीडियो में जानिए कि महादेव ने अर्धनारीश्वर रूप क्यों धारण किया था. पौराणिक कथा के अनुसार, भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की पूजा करते थे और माता पार्वती की उपेक्षा करते थे. उनकी इस भूल को सुधारने और सृष्टि के सृजन का संदेश देने के लिए शिव ने माता पार्वती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर रूप लिया था. इसके अलावा, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब जीवों की वृद्धि के लिए भगवान शिव ने इसी स्वरूप में प्रकट होकर उन्हें स्त्री और पुरुष के मिलन से प्रजनन की प्रेरणा दी थी. अर्धनारीश्वर स्वरूप की उपासना करने से दांपत्य जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.